छातापुर विधायक ने कहा – शुरू से कह रहा था हत्या है, दिशा सालियान केस से जुड़े हैं तार, उद्धव सरकार में दबाए गए थे सबूत
बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एक बार फिर सियासत और जांच तेज हो गई है। सीबीआई द्वारा इस मामले में दोबारा मामला दर्ज किए जाने और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जांच को नई गति मिलने की खबरों के बीच बिहार के पूर्व मंत्री और छातापुर से भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह उर्फ बबलू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और अगर यह हत्या है तो हत्यारों का पर्दाफाश जरूर होगा, चाहे वह कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो।
सहरसा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीरज सिंह बबलू ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के दिन से ही वह इसे आत्महत्या मानने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कहा कि “हम लोग शुरू से ही कह रहे थे कि यह आत्महत्या नहीं हत्या है। जब सुशांत की मौत हुई थी, उस समय हम लोग मुंबई गए थे। वहां जो परिस्थितियां देखीं, जो लोगों से बातचीत हुई, उससे हमें पहले दिन से शक था कि इसमें कुछ बड़ा खेल है।”
*दिशा सालियान से जोड़ा कनेक्शन*
नीरज बबलू ने सुशांत की मौत को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जोड़ते हुए सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान की मौत और सुशांत की मौत के बीच महज कुछ दिनों का अंतर था और दोनों मामलों के तार आपस में जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, “यदि दिशा सालियान के मामले की सच्चाई उस समय सामने आ जाती, तो सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी भी उसी समय सुलझ जाती। दिशा सालियान के साथ क्या हुआ, यह आज तक रहस्य बना हुआ है। उनके पिता उस समय गहरे सदमे में थे और खुलकर कुछ बोल नहीं पा रहे थे। हमें लगता है कि दोनों घटनाएं एक ही कड़ी का हिस्सा हैं।”
उद्धव सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मंत्री ने उस समय महाराष्ट्र में रही उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर सबूतों को मिटाने और मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सुशांत की मौत हुई थी, तब मुंबई पुलिस ने जिस तरह से जांच की, वह संदेह के घेरे में थी।
बबलू ने कहा, “उस समय महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार थी। हमें लगता है कि कई तथ्यों को दबा दिया गया। जब तक सीबीआई जांच की मांग बिहार से उठी और मामला सीबीआई के पास गया, तब तक कई महत्वपूर्ण सबूत मिटाए जा चुके थे। यही कारण है कि उस समय की जांच में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। अगर शुरू में ही ईमानदारी से जांच हुई होती तो आज परिवार को इतना इंतजार नहीं करना पड़ता।”
उन्होंने बताया कि सुशांत के परिवार और बिहार के लोगों की भावनाओं को देखते हुए बिहार सरकार ने भी उस समय सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। बिहार के लोगों के लिए सुशांत सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि बिहार का बेटा था।
अब जगी न्याय की उम्मीद
नीरज सिंह बबलू ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। महाराष्ट्र में सरकार बदल गई है और केंद्र में भी मजबूत सरकार है। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई द्वारा मामला दर्ज किया जाना एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा, “अब समय बदल चुका है, सरकार बदल चुकी है। अब जांच एजेंसियों पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामला दर्ज होने से हमें उम्मीद जगी है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ेगी। हमें पूरा भरोसा है कि सच्चाई सामने आएगी। यदि यह हत्या है, तो हत्या क्यों की गई, किसने की, और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे, इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे। इसमें चाहे कितने भी बड़े नाम शामिल हों, उनका पर्दाफाश होगा।”
बिहार में फिर उठा मुद्दा
सुशांत सिंह राजपूत मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले थे। उनकी मौत के बाद पूरे बिहार में आक्रोश देखा गया था। नीरज सिंह बबलू उन चुनिंदा नेताओं में से थे, जो सबसे पहले मुंबई पहुंचे थे और परिवार से मिले थे। उन्होंने इस मुद्दे को बिहार अस्मिता से जोड़ते हुए लगातार उठाया था। अब एक बार फिर इस मामले के तूल पकड़ने से बिहार की सियासत भी गरमा गई है।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से सुशांत के पिता केके सिंह और पूरे परिवार के साथ-साथ बिहार के करोड़ों लोगों में न्याय की उम्मीद फिर से जगी है। लोग चाहते हैं कि बिहार के लाल को न्याय मिले।
गौरतलब है कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे। मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन परिवार और प्रशंसकों ने इसे हत्या करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। अब नए तथ्यों और याचिका के आधार पर मामले में दोबारा केस दर्ज होने की खबरों ने एक बार फिर इस केस को सुर्खियों में ला दिया है।


