सहरसा (बिहार)। सहरसा सदर अस्पताल में शनिवार को खबर संकलन के दौरान एक डिजिटल मीडिया के पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घायल पत्रकार की पहचान अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर एसके आजाद, अस्पताल मैनेजर सिंपी कुमारी सहित कुछ पैरामेडिकल छात्रों और अस्पताल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है।
दरअसल, बनगांव थाना क्षेत्र स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय वासुदेवा में शनिवार को मध्यान्ह भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने के बाद करीब दो दर्जन बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली थी। सभी बच्चों को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लाया गया। घटना की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में पत्रकार अस्पताल पहुंचे थे।
इसी दौरान खबर कवरेज और पीटीसी के दौरान पत्रकार अभिषेक कुमार की डॉक्टर एसके आजाद से बहस हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर अस्पताल के डॉक्टर, पैरामेडिकल छात्र और अन्य कर्मी उनके साथ मारपीट करने लगे। पत्रकार का दावा है कि उनके साथ करीब 20 मिनट तक मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए नारायण अस्पताल ले जाया गया। घटना के दौरान अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
घटना के बाद पत्रकार अभिषेक कुमार सदर थाना पहुंचे और संबंधित डॉक्टर व अन्य आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। पत्रकारों ने भी मामले को लेकर नाराजगी जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सिविल सर्जन ने कहा- मामले की जांच जारी
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण ने बताया कि वे दिशा की बैठक में शामिल थे। बैठक के दौरान जिलाधिकारी को मध्यान्ह भोजन खाने से बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली, जिसके बाद वे सीधे सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा था। इसी दौरान एक पत्रकार ने सवाल करना शुरू किया और कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।
सिविल सर्जन ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होने पर सहरसा बंद की चेतावनी
पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में नाराज पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल मैनेजर सिंपी कुमारी सहित मारपीट की घटना में शामिल बताए जा रहे अस्पताल कर्मियों को 48 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा गया और सहरसा के सिविल सर्जन का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो सहरसा बंद का आह्वान किया जाएगा।
वहीं, मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के फेसबुक पेज पर भी टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आरजेडी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और बंद के आह्वान की विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर का विस्तृत पक्ष सामने आने तथा जांच पूरी होने के बाद ही विवाद की वास्तविक वजह और आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।


