सहरसा जिले के बनगांव एवं देवनवनगोपाल मौजा की उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित अधिग्रहण के विरोध में किसानों, मत्स्यपालकों, पशुपालकों और ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि इस अधिग्रहण से हजारों परिवारों की आजीविका, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में भी इसी क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के व्यापक विरोध तथा सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) के बाद इसे जनहित में उपयुक्त नहीं मानते हुए रोक दिया गया था। इसके बावजूद उसी क्षेत्र को दोबारा अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया जाना जनभावनाओं के विपरीत बताया गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि बनगांव एवं देवनवनगोपाल क्षेत्र खेती, मत्स्य पालन, मखाना उत्पादन और पशुपालन का प्रमुख केंद्र है। लगभग 100 एकड़ निजी तालाबों में बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन किया जाता है, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसके अलावा यह क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है, जहां बड़ी संख्या में किसान और युवा उद्यमी इस व्यवसाय से जुड़े हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित भूमि धान, गेहूं, मक्का, दलहन एवं तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। साथ ही यहां बड़ी संख्या में फलदार एवं छायादार वृक्ष मौजूद हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और भूजल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र बनने से प्राकृतिक जल निकासी बाधित होगी, जिससे बाढ़ और जलजमाव की समस्या बढ़ सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हाल ही में एनएच-327ई निर्माण के लिए पहले ही किसानों की काफी कृषि भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। ऐसे में दोबारा भूमि अधिग्रहण से किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक प्रभावित होगी।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि जनहित, किसानों की आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनगांव एवं देवनवनगोपाल मौजा की भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण की सभी कार्यवाहियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और इस संबंध में न्यायोचित निर्णय लिया जाए।





