सहरसा जिले के महिषी विधानसभा क्षेत्र के नारायणपुर गांव में कोसी नदी के कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हर साल की तरह इस बार भी नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिससे घनी आबादी वाले इस गांव पर खतरा मंडराने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोसी नदी को अक्सर “शोक की नदी” भी कहा जाता है, क्योंकि हर वर्ष इसके कटाव की वजह से कई परिवारों के घर और जमीन नदी में समा जाते हैं। बावजूद इसके, नदी के कटाव को रोकने के लिए अब तक कोई स्थायी और कारगर व्यवस्था नहीं की गई है।
नारायणपुर गांव के लोगों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग की ओर से किए गए कटाव निरोधी कार्य भी अब नदी की धारा में बहते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सिर्फ खानापूर्ति के लिए बांस रोल जैसे अस्थायी उपाय किए जाते हैं, लेकिन इससे कटाव पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं और अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कई घर और परिवार कोसी नदी की चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नारायणपुर गांव को बचाने के लिए स्थायी कटाव निरोधी कार्य कराया जाए, ताकि हर साल होने वाली तबाही से लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने इस मामले में वीडियो के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की अपील भी की है।






