हल्की बारिश में डूबा सहरसा शहर, जलजमाव ने खोली नगर निगम की तैयारी की पोल
सहरसा: मानसून आने से पहले हुई हल्की बारिश ने ही सहरसा नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। शहर के कई इलाकों में जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कई स्थानों पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
सबसे खराब स्थिति सरवा रेलवे ढाला के समीप देखी जा रही है, जहां सड़क पर जमा पानी के कारण प्रतिदिन वाहन फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और अन्य छोटे वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार जलजमाव की वजह से कई लोग घायल हो चुके हैं, वहीं कुछ लोगों के हाथ-पैर टूटने की भी सूचना सामने आई है।
गौरतलब है कि मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि जब एक दिन की आंधी और बारिश ने ही शहर की स्थिति बदहाल कर दी है, तो मानसून के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।
जलजमाव का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। शहर के कई बाजारों, दुकानों और गैरेजों के आसपास पानी भर जाने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई प्रतिष्ठान पानी से घिर जाने के कारण बंद पड़े हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद नगर निगम प्रशासन द्वारा न तो पर्याप्त पंपिंग की व्यवस्था की गई है और न ही जल निकासी के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया है।
नगरवासियों में बढ़ते आक्रोश के बीच कई लोगों ने नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे “नगर निगम नहीं, नरक निगम” तक करार दिया है। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में जलजमाव की यही समस्या सामने आती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती।
फिलहाल इस मुद्दे पर नगर निगम आयुक्त की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में शहरवासियों का सवाल है कि आखिर कब नगर निगम प्रशासन जागेगा और कब सहरसा को जलजमाव की पुरानी समस्या से निजात मिलेगी।





