पुरानी पेंशन बहाली समेत 32 सूत्री मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मचारियों का हल्लाबोल, सहरसा में आयुक्त कार्यालय पर धरना

संविदा व आउटसोर्सिंग प्रथा खत्म हो

नियमित बहाली और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग, मुख्यमंत्री के नाम आयुक्त को सौंपा ज्ञापन


बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (संबद्ध: अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ) की प्रमंडलीय शाखा, सहरसा के बैनर तले सोमवार को कर्मचारियों और शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कोशी प्रमंडल आयुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कोशी प्रमंडलीय आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम 32 सूत्री मांग-पत्र सौंपा।


धरना को संबोधित करते हुए महासंघ के प्रमंडलीय मंत्री शरद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण कर्मचारियों और शिक्षकों में व्यापक असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब दो-तिहाई पद खाली हैं, जिससे कार्यरत कर्मियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। सरकार नियमित नियुक्तियों की बजाय संविदा, आउटसोर्सिंग और पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देकर युवाओं का शोषण कर रही है।


उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सरकारी तंत्र की अहम भूमिका पूरी दुनिया ने देखी, इसके बावजूद सरकार सरकारी सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जो जनहित के खिलाफ है।


महासंघ ने नई पेंशन योजना (एनपीएस) को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग की। साथ ही केंद्र सरकार की तर्ज पर हर पांच वर्ष में राज्य वेतन आयोग गठित करने की भी मांग उठाई।

मुख्य मांगें

महासंघ ने मांग-पत्र में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, पीएफआरडीए कानून समाप्त करने, संविदा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर नियमितीकरण, समान काम के बदले समान वेतन, न्यूनतम 26 हजार रुपये मानदेय, सभी रिक्त पदों पर नियमित बहाली, जनवरी 2020 से लंबित 18 माह के महंगाई भत्ते का एरियर भुगतान, राजस्व कर्मियों और पंचायत सेवकों के ग्रेड पे में वृद्धि, गृह जिले या नजदीकी जिले में पदस्थापन, सप्ताह में पांच कार्यदिवस लागू करने, सभी कर्मियों व पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा फील्ड कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी में शिथिलता जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल कीं।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

महासंघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार 32 सूत्री मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी, शिक्षक और महासंघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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