सहरसा में 7.77 करोड़ से बने आधुनिक शवदाह गृह का उद्घाटन, ₹3500 शुल्क पर गरीबों ने जताया विरोध

सहरसा: नगर निगम क्षेत्र के कोरलाही वार्ड संख्या-44 में लगभग 7 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक शवदाह गृह का शुक्रवार को विधिवत उद्घाटन किया गया। इस आधुनिक मुक्तिधाम का संचालन ईशा फाउंडेशन को सौंपा गया है। उद्घाटन के बाद यहां पहला अंतिम संस्कार हटिया गाछी वार्ड संख्या-29 निवासी 75 वर्षीय दीप्ती देवी का किया गया।



नगर निगम का दावा है कि आधुनिक शवदाह गृह शुरू होने से शहरवासियों को अंतिम संस्कार की बेहतर, स्वच्छ और आधुनिक सुविधा मिलेगी। करीब 10 कट्ठा क्षेत्र में बने इस परिसर में चार लकड़ी आधारित और दो विद्युत शवदाह इकाइयां स्थापित की गई हैं, जहां एक साथ छह शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। परिसर में स्नानघर, शौचालय, पेयजल और परिजनों के बैठने की भी व्यवस्था की गई है। एक शव के दाह संस्कार में लगभग 60 किलोग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती है।



हालांकि उद्घाटन के साथ ही शवदाह गृह में निर्धारित ₹3500 शुल्क को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का है और अंतिम संस्कार के लिए इतनी बड़ी राशि देना कई परिवारों के लिए मुश्किल होगा। उन्होंने गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए शुल्क में छूट या निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।



फ्रेंड्स ऑफ आनंद के नेता रोहिन दास ने भी शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि कई गरीब परिवारों के पास अपने परिजनों के लिए कफन खरीदने तक के पैसे नहीं होते। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए ₹3500 शुल्क लेना संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से शुल्क कम करने तथा गरीब परिवारों के लिए विशेष राहत देने की मांग की।


मुक्तिधाम में कार्यरत अमरदीप कुमार ने बताया कि यह परियोजना विश्वव्यापी ईशा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में फाउंडेशन द्वारा 33 आधुनिक शवदाह केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक करीब डेढ़ लाख शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। सहरसा का यह केंद्र भी आधुनिक सुविधाओं से लैस है और लोगों को सम्मानजनक एवं व्यवस्थित अंतिम संस्कार की सुविधा प्रदान करेगा।


उधर, स्थानीय लोगों ने नगर निगम से शवदाह गृह की शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए रियायती अथवा निःशुल्क सुविधा लागू करने की मांग की है।

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