कोशी क्षेत्र सहरसा के पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) ने मधेपुरा जिले में लंबित कांडों की समीक्षा करते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। समीक्षा के दौरान कांडों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले चार पुलिस इंस्पेक्टरों का वेतन धारित करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। कार्य में सुधार नहीं होने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश के आलोक में गुरुवार को आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक मधेपुरा सहित सभी अंचल पुलिस निरीक्षक शामिल हुए। बैठक में मई 2026 के दैनिक प्रतिवेदन का अवलोकन किया गया, जिसमें कई थानों में अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण के लिए लंबित कांडों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई।
डीआईजी ने लंबित कांडों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन के लिए जून 2026 में कुल 1978 कांडों के निष्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया। सभी अंचल पुलिस निरीक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे अनुसंधानकर्ताओं के पास लंबित कांडों की संख्या, अनुसंधान की गुणवत्ता, गिरफ्तारी, वारंट की कार्रवाई एवं कांड दैनिकी लेखन की नियमित समीक्षा करें।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। इसको लेकर संबंधित पुलिस निरीक्षकों से जवाब-तलब किया गया है। साथ ही अधिक लंबित कांड वाले अनुसंधानकर्ताओं के कार्यभार को उनकी क्षमता के अनुसार अन्य अनुसंधानकर्ताओं में विभाजित करने का निर्देश दिया गया।
डीआईजी ने स्पष्ट कहा कि कांड दैनिकी लेखन में लापरवाही करने वाले अनुसंधानकर्ताओं के खिलाफ अंचल पुलिस निरीक्षक एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करें। वहीं, एक माह में कम से कम पांच कांडों का निष्पादन करने वाले बेहतर अनुसंधानकर्ताओं को पुरस्कृत करने का प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया।
डीआईजी ने बताया कि लंबित कांडों की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह की जाएगी। अगली समीक्षा बैठक अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षक के साथ होगी, जिसमें कांडों के गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और समयबद्ध निष्पादन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।









